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Share Market: पस्त हुआ शेयर बाजार, कच्चे तेल में उबाल का दिखा असर; सेंसेक्स-निफ्टी फिसले

मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में कारोबारी सप्ताह के दौरान कमजोरी देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, वैश्विक बाजारों से मिले मिले-जुले संकेत और निवेशकों की सतर्कता के चलते बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार में बिकवाली का दबाव बैंकिंग, ऑटो, आईटी और मेटल सेक्टर के कई शेयरों पर भी देखने को मिला।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर

विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में क्रूड ऑयल महंगा होने से आयात बिल बढ़ने और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।

सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट

कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन दिन के अंत तक दोनों सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। कमजोर वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।

किन सेक्टरों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर?

बाजार की गिरावट के दौरान कई प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे—

  • बैंकिंग शेयर

  • आईटी सेक्टर

  • ऑटोमोबाइल कंपनियां

  • मेटल शेयर

  • रियल्टी सेक्टर

हालांकि कुछ डिफेंसिव सेक्टरों जैसे एफएमसीजी और हेल्थकेयर में सीमित खरीदारी देखने को मिली।

निवेशकों की बढ़ी चिंता

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि निवेशक फिलहाल कई वैश्विक और घरेलू कारकों पर नजर बनाए हुए हैं। इनमें—

  • कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव

  • विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियां

  • अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दर नीति

  • डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल

  • कंपनियों के तिमाही नतीजे

जैसे कारक आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव सामान्य है। ऐसे समय में निवेशकों को घबराकर फैसले लेने के बजाय लंबी अवधि की निवेश रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में चरणबद्ध निवेश (SIP या नियमित निवेश) बेहतर विकल्प हो सकता है।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?

यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है और वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत मिलते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में निकट भविष्य में अस्थिरता बनी रह सकती है। वहीं, बेहतर कॉर्पोरेट नतीजे और विदेशी निवेश में सुधार बाजार को फिर से मजबूती दे सकते हैं।

निष्कर्ष

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार दबाव में दिखाई दिया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को ऐसे माहौल में सतर्क रहकर निवेश करने और बाजार की प्रमुख आर्थिक गतिविधियों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

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